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यह मेरा सबसे अच्छा ब्लॉग है जिसे Hindi Poems के नाम से जाना जाता है। इस ब्लॉग में, हिंदी कविताओं  के माध्यम से प्रकृति, आध्यात्मिकता, सामाजिक, पारिवारिक और प्रेम से संबंधित सभी तथ्यों से अवगत कराया जाएगा। मेरे सभी विश्व मित्रों को नमस्कार! मुझे आपके मार्गदर्शन की आवश्यकता है ताकि मेरा आत्मविश्वास इस तरह से बढ़े।

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आदमी से बड़ा सदाचारी कोई नहीं

 आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं आदमी से बड़ा सदाचारी कोई नहीं उजाड़ के आशियाने दूसरों के  घर अपना बनाता कोई नहीं  लुप्त करे जो प्रजातियां जीवों की  इससे बड़ा स्वार्थी कोई नहीं आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं आदमी से बड़ा सदाचारी कोई नहीं ऐसे भी हैं बहुत से आदमी जो पशु प्रेमी कहलाते हैं  आशियाना भी देते हैं खाना भी  कोई पशुओं के लिए गौशाला बनवाता है  तो कोई बेघर मुसाफिरों के लिए घर्मशाला  जो दे छत पे दाना पानी परिंदों को  और छत के नीचे खाना पानी पशुओं और बेघरों को उससे बड़ा रखवाला कोई नहीं  आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं आदमी से बड़ा सदाचारी कोई नहीं आदमी आदमी को न समझे तो पशु पक्षियों और जानवरों कैसे समझे कहता आदमी अभिमान से आदमी जैसा कोई नहीं सच तो ये है की आदमी से बड़ा पापी कोई नहीं आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं आदमी से बड़ा सदाचारी कोई नहीं  आदमी चाहे तो आदमी को जानवर से भी बदतर बना दे आदमी को कुत्ता बना दे  कुत्ते को आदमी बना दे  आंबेडकर के नाम पे  इंसानियत का ढोंग करने वालों से बड़ा  ढोंगी कोई नहीं 

खुद को अपग्रेड कीजिये- कोरोना स्पेशल -1

खुद को अपग्रेड कीजिये- कोरोना स्पेशल -1 खुद को अपग्रेड कीजिये और कोरोना से आगे निकल जाइये , बचाना है अगर खुद को कोरोना से फुल्ली डिजिटलाइज़्ड हो जाइये ।                                                       बहार कोरोना बेलगाम दौड़ रहा है                                                       बैंक से पैसे निकालने मत जाइये ,                                                      जरुरत भर का सामान अगर है मंगाना                                                      ऑनलाइन शॉपिंग अपनाइये । खुद को अपग्रेड कीजिये और कोरोना से आगे निकल जाइये , बचाना है अगर खुद को कोरोना से फुल्ली डिजिटलाइज़्ड हो जाइये ।                                                         इस फड़फड़ाती हुई बॉडी को                                                         थोड़ी लगाम दीजिये ,                                                         इनडोर गेम खेलिए                                                        आउटडोर पर न

मेरे कुछ सपने हैं......

   मेरे कुछ सपने हैं...... मेरे कुछ सपने हैं  जो अपने नाम करने हैं  मर कर भी याद रखें सब  ऐसे काम करने हैं........... कल्पनाओं के सागर मैं  गहराई तक जाये  मुझे ऐसे गोते लगाने हैं मेरे कुछ सपने हैं जो अपने नाम करने हैं मर कर भी याद रखें सब  ऐसे काम करने हैं.......... असफलताओं ने मेरी जिंदगी मैं  फीकेपन बहुत दिए  मैंने सफल होने को  लाख जतन  किये वाबजूद इसके जज्बा मेरा  अब भी वही है रास्ते नए हैं मुझे भी तो अपनी सफलताओं के दिए जलाने  हैं  रंगीन हो जाये मेरी दुनिया मुझे ऐसे रंग भरने हैं मेरे कुछ सपने हैं  जो अपने नाम करने हैं मर कर भी याद रखें सब  ऐसे काम करने हैं.......... कल-कल करती आवाज झील के पानी की और नगमे सुनाते झरने हैं जिंदगी मैं कभी नाराज थे जो मुझसे  वो रूठे लोग मनाने हैं   मेरे कुछ सपने हैं जो अपने नाम करने हैं मर कर भी याद रखें सब  ऐसे काम करने हैं.......... भटका न सके जो हमको  वो रास्ते सीधे बनाने हैं  अपना बनाके धोखा दे जो  वो दुश्मन हराने हैं  मेरे कुछ सपने हैं  जो अपने नाम करने हैं  मर कर भी याद रखें