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हाँ मैं पागल हूँ!.......

  हाँ मैं पागल हूँ!..... हाँ मैं पागल हूँ! लोग कहते है कि  मैं पागल हूँ   दुनिया तो जूते खाने के काम करती है कितना भी हाँको इसे  एक ही भेड़-चाल मैं चलती है  जरूरी नहीं जो दुनिया करे  वो हम भी करें आज-दुखी हैं तो क्या हुआ   सुखी-कल का निर्माण करें  भिगो दूंगा सबकी आँखों को तुम्हारे पश्चाताप के आंसुओं से   सूखे से जो राहत दे   सावन की पहली बरसात का  मैं वो बादल हूँ  हाँ मैं पागल हूँ! लोग कहते हैं कि  मैं पागल हूँ   झूठ बोलना न जानू मैं  न रिश्वत लेना जानू मैं  फिर फँस जाऊ अगर   झूठे-जाल मैं लोगों के  मैं कितना नादान हूँ रोज़ घर वालों की खरी-खोटी सुनु मैं  उनकी भी मानु मैं  जिनकी मैं संन्तान हूँ  हाँ मैं पागल हूँ! लोग कहते हैं कि  मैं पागल हूँ आज मैं आज नहीं हूँ लेकिन आने वाला कल हूँ मैं मैं नहीं कर सकता  मैं क्यों नहीं कर सकता  मैं कर सकता हूँ मैं जरूर कर सकता हूँ असंभव को संभव करने वाला  दल-बदल हूँ मैं  हाँ मैं पागल हूँ! लोग कहते हैं कि  मैं  पागल  हूँ लेखक