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कच्छा-बनियानधारी-मौसमी डकैती

कच्छा-बनियानधारी   कभी यहाँ मारा-मारी  कभी वहां मारा-मारी  लो आ गए  ये कच्छा-बनियानधारी  कपडे भी पहन कर नहीं आते है  नंगे चले आते है  लम्बे चौड़े शरीर पर  खूब सारा तेल लगा कर आते हैं  लूट कर तो जाते ही हैं  जाते-जाते खटिया से बांध जाते है  पकड़ मैं आते नहीं  पड़ जाते भारी  कभी यहाँ मारा-मारी  कभी वहां मारा-मारी  लो आ गए  ये कच्छा-बनियानधारी पकड़ मैं कैसे आये  हाथ फिसल जाते हैं  खूब सारा तेल लगा  चिकने हो जाते हैं  मार भी है इनकी  बड़ी निराली  हाथ पैर तोड़ जाते हैं  कभी किसी की बकरी  तो कभी किसी की भैंस  चुरा ले जाते है  कुछ मत बोल बहना  न री...न री ..... कभी यहाँ मारा-मारी  कभी वहां मारा-मारी  लो आ गए  ये कच्छा-बनियानधारी   लेखक