सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

आदमी से बड़ा सदाचारी कोई नहीं



 आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं


आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं
आदमी से बड़ा सदाचारी कोई नहीं


उजाड़ के आशियाने दूसरों के
 घर अपना बनाता कोई नहीं
 लुप्त करे जो प्रजातियां जीवों की
 इससे बड़ा स्वार्थी कोई नहीं


आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं
आदमी से बड़ा सदाचारी कोई नहीं

ऐसे भी हैं बहुत से आदमी
जो पशु प्रेमी कहलाते हैं
 आशियाना भी देते हैं खाना भी
 कोई पशुओं के लिए
गौशाला बनवाता है
 तो कोई बेघर मुसाफिरों के लिए घर्मशाला
 जो दे छत पे दाना पानी परिंदों को
 और छत के नीचे खाना पानी पशुओं और बेघरों को
उससे बड़ा रखवाला कोई नहीं 


आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं
आदमी से बड़ा सदाचारी कोई नहीं


आदमी आदमी को न समझे
तो पशु पक्षियों और जानवरों कैसे समझे
कहता आदमी अभिमान से
आदमी जैसा कोई नहीं
सच तो ये है की
आदमी से बड़ा पापी कोई नहीं


आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं
आदमी से बड़ा सदाचारी कोई नहीं


 आदमी चाहे तो आदमी को
जानवर से भी बदतर बना दे
आदमी को कुत्ता बना दे
 कुत्ते को आदमी बना दे
 आंबेडकर के नाम पे
 इंसानियत का ढोंग करने वालों से बड़ा
 ढोंगी कोई नहीं 


आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं
आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं


जंगलों को खाक करके
आशियाना अपना बना ले
बेजुबानों को हलाल करके
 खाना अपना बना ले
जो करे क़त्ल बेजुबानों का
 ऐसा कातिल कोई नहीं


आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं
आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं 


मैं भी आदमी हूँ
इसलिए बराबर का हूँ भागीदार
 इसके कर्म मैं
मैं शिकार हूँ इसके वंश का
 जो पैदा हुआ इसके वंश मैं
 मुझसे बड़ा भागी कोई नहीं


आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं
आदमी से बड़ा सदाचारी कोई नहीं 


मिलावटी घी मिलावटी दूध और मिलावटी तेल
मिलावट के फेर मैं
खेल रहे लोगों की जिंदगी से खेल
 फिर भी नहीं होती
 ऐसे मिलावटखोरों को
 काले पानी की जेल
ऐसा है इन मिलावटखोरों का मेल
पीट पीट कर निकाल देते है
 बेचारे फ़ूड इंस्पेक्टर का तेल
इन मिलावटखोरों की तरह
 जहर बांटता कोई नहीं


आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं
आदमी से बड़ा सदाचारी कोई नहीं 


हिन्दू हो या मुस्लिम हो या हो सिख या ईसाई
पशुओं की बलि चढ़ाये के
 जो करते समाज की भलाई
अगर हो समाज की भलाई
तो अपनी बलि क्यों न दे
 ये समाज के ठेकेदार
मिटा दें अपना नामो निशान
तो फिर न हो कभी किसी पर अत्याचार
धर्म के नाम पर जो करते
सब पर अत्याचार
 ऐसे धर्मात्मा से बड़ा व्यभिचारी कोई नहीं


आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं
आदमी से बड़ा सदाचारी कोई नहीं 


हाथी चूहा शेर और बन्दर
जिनकी कृपा दृष्टि के पत्र है
उस भगवन की पूजा करते लोग हजार हैं
फिर भी उनके वंशजों और वाहनों पर
करते अत्याचार हैं
कभी मथुरा वृन्दावन
 तो कभी चारों धाम मैं
फलते फूलते जीव जंतु
आराम ही आराम हैं
आसरा दे जो सभी जीव जंतुओं को
उससे बड़ी विरासत कोई नहीं


आदमी से बड़ा सदाचारी  कोई नहीं
आदमी से बड़ा सदाचारी कोई नहीं

टिप्पणियां

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

खुद को अपग्रेड कीजिये- कोरोना स्पेशल -1

खुद को अपग्रेड कीजिये- कोरोना स्पेशल -1 खुद को अपग्रेड कीजिये और कोरोना से आगे निकल जाइये , बचाना है अगर खुद को कोरोना से फुल्ली डिजिटलाइज़्ड हो जाइये ।                                                       बहार कोरोना बेलगाम दौड़ रहा है                                                       बैंक से पैसे निकालने मत जाइये ,                                                      जरुरत भर का सामान अगर है मंगाना                                                      ऑनलाइन शॉपिंग अपनाइये । खुद को अपग्रेड कीजिये और कोरोना से आगे निकल जाइये , बचाना है अगर खुद को कोरोना से फुल्ली डिजिटलाइज़्ड हो जाइये ।                                                         इस फड़फड़ाती हुई बॉडी को                                                         थोड़ी लगाम दीजिये ,                                                         इनडोर गेम खेलिए                                                        आउटडोर पर न

मेरे कुछ सपने हैं......

   मेरे कुछ सपने हैं...... मेरे कुछ सपने हैं  जो अपने नाम करने हैं  मर कर भी याद रखें सब  ऐसे काम करने हैं........... कल्पनाओं के सागर मैं  गहराई तक जाये  मुझे ऐसे गोते लगाने हैं मेरे कुछ सपने हैं जो अपने नाम करने हैं मर कर भी याद रखें सब  ऐसे काम करने हैं.......... असफलताओं ने मेरी जिंदगी मैं  फीकेपन बहुत दिए  मैंने सफल होने को  लाख जतन  किये वाबजूद इसके जज्बा मेरा  अब भी वही है रास्ते नए हैं मुझे भी तो अपनी सफलताओं के दिए जलाने  हैं  रंगीन हो जाये मेरी दुनिया मुझे ऐसे रंग भरने हैं मेरे कुछ सपने हैं  जो अपने नाम करने हैं मर कर भी याद रखें सब  ऐसे काम करने हैं.......... कल-कल करती आवाज झील के पानी की और नगमे सुनाते झरने हैं जिंदगी मैं कभी नाराज थे जो मुझसे  वो रूठे लोग मनाने हैं   मेरे कुछ सपने हैं जो अपने नाम करने हैं मर कर भी याद रखें सब  ऐसे काम करने हैं.......... भटका न सके जो हमको  वो रास्ते सीधे बनाने हैं  अपना बनाके धोखा दे जो  वो दुश्मन हराने हैं  मेरे कुछ सपने हैं  जो अपने नाम करने हैं  मर कर भी याद रखें